top of page

7 चक्रा और राम नाम ध्यान धारणा - प्रवेश पत्रिका

7 Chakra & Ram Meditation - Admission Form

आप चक्रा और राम नाम - ध्यानधारणा (Meditation) क्यों करना चाहते है ?

आप एक से भी ज्यादा विकल्प को चुन सकते है। You can choose more than one option.

ध्यान धारणा - गुरुदक्षिणा
  • कृपया गुरु दक्षिणा - Google Pay नंबर 7710995881 या UPI आईडी (khaleprash@okaxis.com) पर भुगतान करें। खाता नाम - प्रशांत खाले

  • Kindly pay on google Pay number 7710995881 or UPI id (khaleprash@okaxis.com) Account name - Prashant Khale

ram जी.jpg

राम‑नाम ध्यान से क्या प्राप्त होता है?

- राम‑नाम ध्यान से मनुष्य को वही गुण, वही शक्ति, वही स्थिरता और वही तेज प्राप्त होता है, जिन्हें “मानव‑स्तर की सिद्धियाँ” कहा जा सकता है। दैवी‑स्तर की सिद्धियाँ मनुष्य को नहीं मिलतीं, पर उनके प्रभाव के समान गुण अवश्य जागते हैं।

१. राम‑नाम से मिलने वाले लाभ (मानव‑स्तर की सिद्धियाँ)

 

(क) मन‑सिद्धि

  • मन शांत

  • क्रोध कम

  • विचार शुद्ध

  • यही “अनिमा‑सिद्धि” का मानव रूप

 

(ख) संकल्प‑सिद्धि

  • जो ठान लिया, वह पूरा

  • मन डगमगाता नहीं

  • यही “प्राकाम्य‑सिद्धि” का मानव रूप

 

(ग) भय‑शून्यता

  • निर्भयता

  • कठिन परिस्थिति में स्थिरता

  • यही “गरिमा‑सिद्धि” का मानव रूप

 

(घ) ऊर्जा‑सिद्धि

  • शरीर हल्का

  • काम की गति बढ़ती है

  • यही “लघिमा‑सिद्धि” का मानव रूप

 

(ङ) आकर्षण‑शक्ति

  • वाणी में प्रभाव

  • व्यक्तित्व में तेज

  • यही “वशिता‑सिद्धि” का मानव रूप

 

२. राम‑नाम ध्यान कैसे कार्य करता है?

 

(क) ध्वनि‑शक्ति

“राम” शब्द में दो ध्वनियाँ हैं:

  • र = प्रकाश, ऊर्जा

  • म = स्थिरता, शांति

दोनों मिलकर मन को तेज + शांत बनाते हैं।

 

(ख) प्राण‑शुद्धि

  • श्वास गहरी होती है

  • प्राण ऊपर उठते हैं

  • मन हल्का होता है

 

(ग) चित्त‑एकाग्रता

  • ध्यान गहरा

  • विचार एक दिशा में

  • संकल्प मजबूत

 

(घ) अहंकार‑क्षय

  • “मैं” कम

  • सेवा‑भाव बढ़ता है

  • यही हनुमान‑तत्त्व है

 

३. राम‑नाम ध्यान की सरल विधि (शुद्ध हिन्दी में)

 

पहला चरण — श्वास

  • चार गणना में श्वास लो

  • चार गणना रोककर रखो

  • चार गणना में छोड़ो

 

दूसरा चरण — मंत्र

मन में धीरे‑धीरे:

राम… राम… राम…

 

तीसरा चरण — प्रकाश‑कल्पना

  • हृदय में सुनहरा प्रकाश

  • “र” = प्रकाश

  • “म” = स्थिरता

 

चौथा चरण — संकल्प

मन में एक वाक्य:

मैं शांत हूँ। मैं तेज हूँ। मैं निर्भय हूँ।

 

पाँचवाँ चरण — मौन

कुछ क्षण पूर्ण शांति

 

४. सार‑वाक्य (गुरुकुल‑स्तर)

राम‑नाम ध्यान = मन की शुद्धि + प्राण की वृद्धि + संकल्प‑शक्ति → मानव‑स्तर की सिद्धियाँ।

ChatGPT Image Feb 26, 2026, 02_47_16 PM.png

१. अष्ट‑सिद्धि — शास्त्रों में वर्णन

अष्ट‑सिद्धियाँ योग‑शास्त्र, तंत्र‑शास्त्र और पुराणों में वर्णित आठ दिव्य शक्तियाँ हैं। इनका मूल उल्लेख —

  • पतंजलि योगसूत्र,

  • शिवपुराण,

  • विष्णु पुराण,

  • हनुमान‑चरित,

  • रामायण में मिलता है।

 

अष्ट‑सिद्धि (शास्त्रीय रूप में)

 

१. अणिमा‑सिद्धि

  • साधक अपने शरीर को परमाणु के समान सूक्ष्म कर सकता है।

  • यह शक्ति केवल दिव्य पुरुषों को प्राप्त होती है।

 

२. महिमा‑सिद्धि

  • साधक अपने शरीर को पर्वत के समान विशाल कर सकता है।

  • यह शक्ति देवताओं और सिद्ध पुरुषों में वर्णित है।

 

३. गरिमा‑सिद्धि

  • शरीर को इतना भारी कर लेना कि कोई हिला न सके।

  • यह शक्ति योगियों की सिद्धि मानी गई है।

 

४. लघिमा‑सिद्धि

  • शरीर को इतना हल्का कर लेना कि आकाश में विचरण कर सके।

  • यह शक्ति केवल दिव्य साधकों में वर्णित है।

 

५. प्राप्ति‑सिद्धि

  • दूर स्थित वस्तु को तुरंत प्राप्त कर लेना।

  • यह शक्ति योगियों और देवताओं में वर्णित है।

 

६. प्राकाम्य‑सिद्धि

  • जो इच्छा करे, वह तुरंत पूर्ण हो जाए।

  • यह शक्ति केवल सिद्ध‑पुरुषों को प्राप्त होती है।

 

७. ईशिता‑सिद्धि

  • प्रकृति और तत्वों पर नियंत्रण।

  • यह शक्ति देवताओं के समान मानी गई है।

 

८. वशिता‑सिद्धि

  • जीव‑जंतु, मन, प्रकृति — सबको वश में कर लेना।

  • यह शक्ति अत्यन्त दुर्लभ और दिव्य है।

 

२. नव‑निधि — शास्त्रों में वर्णन

नव‑निधियाँ कुबेर की नौ दिव्य संपत्तियाँ हैं। इनका वर्णन —

  • अग्नि पुराण,

  • गरुड़ पुराण,

  • शिव पुराण,

  • रामायण में मिलता है।

 

नव‑निधि (शास्त्रीय रूप में)

 

१. पद्म‑निधि

  • कमल के समान शुद्ध, दिव्य, अनंत धन।

 

२. महापद्म‑निधि

  • पद्म से भी अधिक विशाल, अनंत संपदा।

 

३. शंख‑निधि

  • शुभता, सौभाग्य और दिव्य धन।

 

४. मकर‑निधि

  • सुरक्षा देने वाली दिव्य संपदा।

 

५. कच्छप‑निधि

  • स्थिर, अचल, सुरक्षित धन।

 

६. मुकुन्द‑निधि

  • मोक्ष देने वाली दिव्य संपदा।

 

७. नन्द‑निधि

  • आनंद, प्रसन्नता और सौभाग्य।

 

८. नील‑निधि

  • रहस्यमय, गूढ़, अदृश्य धन।

 

९. खर्व‑निधि

  • त्वरित उपलब्धि देने वाली संपदा।

 

३. हनुमान‑जी ने अष्ट‑सिद्धि और नव‑निधि कैसे प्राप्त कीं? (शास्त्रों के अनुसार)

यह उत्तर केवल शास्त्रों पर आधारित है — कोई आधुनिक व्याख्या नहीं।

 

(क) सूर्यदेव से शिक्षा

बाल्यकाल में हनुमान‑जी ने सूर्यदेव को गुरु बनाकर वेद, वेदांग, योग, ध्यान, आयुर्वेद आदि सीखा। शास्त्र कहते हैं कि गुरु‑कृपा से सिद्धियाँ जागृत होती हैं।

 

(ख) ब्रह्मचर्य और तपस्या

हनुमान‑जी पूर्ण ब्रह्मचारी थे। उनकी तपस्या, योग‑साधना और प्राण‑शक्ति के कारण वे दिव्य शक्तियों के अधिकारी बने।

 

(ग) भगवान राम का वरदान

सबसे महत्वपूर्ण शास्त्रीय प्रमाण:

रामचरितमानस (सुंदरकाण्ड)

सीता‑माता ने हनुमान‑जी को आशीर्वाद दिया:

“अष्ट‑सिद्धि नव‑निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥”

अर्थ: सीता‑माता ने हनुमान‑जी को वरदान दिया कि वे अष्ट‑सिद्धि और नव‑निधि के दाता बनें।

यह शास्त्र का सबसे स्पष्ट प्रमाण है।

 

(घ) राम‑भक्ति

हनुमान‑जी की भक्ति इतनी गहरी थी कि भगवान राम ने उन्हें दिव्य शक्तियों का अधिकारी बनाया।

 

४. शास्त्रीय निष्कर्ष

  • अष्ट‑सिद्धि = आठ दिव्य शक्तियाँ

  • नव‑निधि = नौ दिव्य संपत्तियाँ

  • दोनों दैवी‑स्तर की शक्तियाँ हैं

  • हनुमान‑जी को यह शक्तियाँ

    • गुरु‑कृपा

    • तपस्या

    • ब्रह्मचर्य

    • राम‑भक्ति

    • और सीता‑माता के वरदान से प्राप्त हुईं।

Meditation poster.png

7 चक्र ध्यान क्यों सीखें?

(प्रत्येक चक्र के अनुसार 7 कारण)

 

1️⃣ मूलाधार चक्र – स्थिरता और सुरक्षा

  • आंतरिक सुरक्षा की भावना मजबूत करने के लिए

  • भय और असुरक्षा कम करने के लिए

  • आर्थिक और जीवन आधार स्थिर करने के लिए

  • मानसिक ग्राउंडिंग विकसित करने के लिए

  • तनाव में स्थिर रहने की क्षमता बढ़ाने के लिए

  • आत्मविश्वास की जड़ मजबूत करने के लिए

  • जीवन में मजबूत फाउंडेशन बनाने के लिए

 

2️⃣ स्वाधिष्ठान चक्र – भावना और सृजन

  • भावनात्मक संतुलन के लिए

  • सृजनात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए

  • संबंधों में मधुरता लाने के लिए

  • अपराधबोध और दबाव कम करने के लिए

  • आनंद और उत्साह जागृत करने के लिए

  • मानसिक लचीलापन बढ़ाने के लिए

  • जीवन में प्रवाह (Flow) अनुभव करने के लिए

 

3️⃣ मणिपुर चक्र – आत्मबल और क्रिया

  • आत्मविश्वास मजबूत करने के लिए

  • निर्णय क्षमता स्पष्ट करने के लिए

  • इच्छाशक्ति बढ़ाने के लिए

  • नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए

  • लक्ष्य पर केंद्रित रहने के लिए

  • आलस्य और टालमटोल कम करने के लिए

  • व्यक्तिगत शक्ति जागृत करने के लिए

 

4️⃣ अनाहत चक्र – प्रेम और करुणा

  • संबंधों में संतुलन के लिए

  • क्षमा की भावना विकसित करने के लिए

  • आत्म-स्वीकृति बढ़ाने के लिए

  • करुणा और सहानुभूति बढ़ाने के लिए

  • भावनात्मक उपचार के लिए

  • द्वेष और कटुता कम करने के लिए

  • आंतरिक शांति अनुभव करने के लिए

 

5️⃣ विशुद्ध चक्र – अभिव्यक्ति और सत्य

  • स्पष्ट संवाद कौशल के लिए

  • सत्य बोलने का साहस विकसित करने के लिए

  • अभिव्यक्ति में आत्मविश्वास के लिए

  • मंच भय कम करने के लिए

  • रचनात्मक अभिव्यक्ति बढ़ाने के लिए

  • गलतफहमियाँ कम करने के लिए

  • प्रभावशाली व्यक्तित्व निर्माण के लिए

 

6️⃣ आज्ञा चक्र – अंतर्दृष्टि और दृष्टि

  • अंतर्ज्ञान जागृत करने के लिए

  • मानसिक स्पष्टता के लिए

  • निर्णय में दूरदृष्टि विकसित करने के लिए

  • भ्रम और द्वंद्व कम करने के लिए

  • ध्यान की गहराई बढ़ाने के लिए

  • जीवन लक्ष्य स्पष्ट करने के लिए

  • आत्म-जागरूकता बढ़ाने के लिए

 

7️⃣ सहस्रार चक्र – चेतना और एकत्व

  • आंतरिक शांति अनुभव करने के लिए

  • आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने के लिए

  • अहंकार की सीमाएँ कम करने के लिए

  • जीवन उद्देश्य से जुड़ने के लिए

  • ध्यान की उच्च अवस्था प्राप्त करने के लिए

  • सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए

  • समग्र संतुलन और संतोष के लिए

“Why Meditation?” या “ध्यान क्यों करें?”

🌿 Meditation Benefits (ध्यान के लाभ)

 

🧘‍♂️ शारीरिक लाभ

  • तनाव और थकान कम करता है

  • नींद की गुणवत्ता सुधारता है

  • रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य संतुलित करता है

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है

 

🌸 मानसिक लाभ

  • एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाता है

  • चिंता और अवसाद को कम करता है

  • भावनात्मक संतुलन लाता है

  • निर्णय लेने की क्षमता मजबूत करता है

 

🔱 आध्यात्मिक लाभ

  • आत्म-जागरूकता और आत्म-शांति का अनुभव

  • मौन साधना से गहन ऊर्जा जागरण

  • करुणा, प्रेम और धैर्य की वृद्धि

  • जीवन में उद्देश्य और दिशा स्पष्ट करता है

 

🌍 सामाजिक लाभ

  • संबंधों में सामंजस्य और समझ बढ़ाता है

  • कार्यस्थल पर उत्पादकता और सहयोग बढ़ाता है

  • समाज में शांति और सकारात्मकता फैलाता है

bottom of page